२२ श्रुतियों से बना संगीत
उन २२ में आत्मसाक्षात्कार
उन २२ में आत्मविभाजन
कुछ संभव सा
कुछ असंभव सा - ये सफर
जारी है।
श्रुयते इति श्रुति: - बस इसी ईश्वर की वाणी को
वेदों, धर्मग्रंथों के ज्ञान को सुनना, आत्मसम्मेलन एक उद्देश।
यह तो हुआ शाब्दिक तात्पर्य पर वास्तविक खोज यकीनन शाब्दिक अर्थ से ज्यादा जटिल।
मैं संगीत का नाद तो नहीं पर संगीत में रुचि तो है।
शायद नाम का ही असर है।
वेदों का सुना ज्ञान भी नहीं पर उसके प्रति हमेशा जिज्ञासु।
और न ही मैं देवी पार्वती, बस उनका एक स्वरूप।
आशा है श्रुति से यह मुलाकात आपको रास आई।
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