Thursday, June 8, 2023

अग्नि


मैं, अग्नि
- प्रकृति के पंच तत्त्वों में एक
यज्ञों में पावक संचालिका।
हीरा मेरी तपिश से निखरा 
रावण मेरी तपिश से भस्म
मुझे समझने के लिए तुम्हें कोई अग्निपरीक्षा नहीं देनी होगी
न ही कोई जोहर करना होगा
अपने प्राणों की आहुति नहीं देनी होगी
मैं एक आईने समान -
तुम्हारे स्वरूप को प्रत्यक्ष दर्शाती —
मेरे प्रभाव से सदाचारी प्रह्लाद जीवंत
तो प्रकोप से दुराचारी होलिका का दहन
तुम्हारे जीवन पर्यंत मेरी उपयोगिता
और जीवन का अंत मुझमें ही।


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