Wednesday, June 3, 2026

सुकून

क्या तुम्हारे जीवन में भी सुकून का यही मायना है? 


कभी आँखों से तुम्हारे आँसुओं का 
बह जाना सुकून है
तो कभी उनका रह जाना

कभी चार पन्नों की कविता लिखना 
तो कभी उन्हीं चार पन्नों को तकते रहना 
मगर कुछ न लिख पाना

कभी सब कुछ बेझिझक बोल देना
तो कभी सैकड़ों विचारों के सैलाब में 
उलझकर कुछ न बोल पाना

कभी लंबी सैर पर जाना
तो कभी पैर पसार कर आराम करना

कभी लंबे तनाव के बाद एक पल राहत
तो कभी लंबे आराम के बाद थोड़ी मेहनत

हर पहलू में सुकून पाने के कई मायने हैं -

कभी जो चीज़ हमें सुकून देती है, 
कभी और उससे दूर कर देती है।

तो जहाँ भी हो, 
सुकून भरे लम्हें बटोरते चलो!

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