Thursday, June 8, 2023

अग्नि


मैं, अग्नि
- प्रकृति के पंच तत्त्वों में एक
यज्ञों में पावक संचालिका।
हीरा मेरी तपिश से निखरा 
रावण मेरी तपिश से भस्म
मुझे समझने के लिए तुम्हें कोई अग्निपरीक्षा नहीं देनी होगी
न ही कोई जोहर करना होगा
अपने प्राणों की आहुति नहीं देनी होगी
मैं एक आईने समान -
तुम्हारे स्वरूप को प्रत्यक्ष दर्शाती —
मेरे प्रभाव से सदाचारी प्रह्लाद जीवंत
तो प्रकोप से दुराचारी होलिका का दहन
तुम्हारे जीवन पर्यंत मेरी उपयोगिता
और जीवन का अंत मुझमें ही।


Wednesday, May 3, 2023

अंग्रेज़ीयत और हम


अंग्रेज़ चले गए
अंग्रेज़ीयत छोड़ गए
तो क्यों अंग्रेज़ीयत ने अब भी जकड़ा है?
जो श्वेत वह सुंदर
जो अश्वेत वह कृष्ण — नहीं?
एक ओर काली माँ पूजनीय
तो दूसरी ओर काली पुत्री अपूजनीय?
क्यों यह दोगुलापन?
जो हिंदी में बात करे वह गंवार
वहीं अंग्रेजी में वार्तालाप – अच्छी शिक्षा का प्रमाण!
कुछ समझ आया?
मुझे तो नहीं!
अंतर करके हुआ बंटवारा
तो क्यों न साथ चलने की मानसिकता से जुड़ें
जिस रंग / भाषा / जात इत्यादि ने हमे बाँटा
वही हमें जोड़े तो?
अनेकता में एकता नहीं तो स्वाधीन भारत का मायना ही क्या?!

Choose your reality

I am not a genius. I really like posting things. And quite often. From the morning hues to nature greens, Backpack tr...